कोरोना संक्रमित होने और होम आइसोलेशन का अनुभव
7 नवंबर को मेरा कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया था और 23 नवंबर को मेरा 17 दिन का होम आइसोलेशन पूरा हो गया और अभी मैं पहले से स्वस्थ महसूस कर रहा हूं, इस मुश्किल समय में अपने अपने तरीके से मेरा हौसला बढ़ाने वाले मेरे परिवार सदस्य और दोस्तों को मैं धन्यवाद कहना चाहूंगा |
मैं अपना कोरोना संक्रमित होने और ठीक होने का अनुभव बताना चाहूंगा, शायद इसे पढ़ के कुछ लोगों को कुछ सीखने को मिले|
भाग 1- कोरोना पॉजिटिव
30 अक्टूबर को7 माह बाद मैं कार से बिलासपुर गया था और 3 दिन रुका था, वहां मैं एक समारोह में गया था और एक एग्जाम दिलाया। वहां मुझे बुखार आया था, जिसको ठीक करने के लिए मैंने स्वयं से मेडिसिन लेके खाया था, जिससे बुखार चला गया था।
1 नवंबर को मैं बस से घर वापस आया, तब मैं ठीक था परंतु 2 नवंबर से मुझे स्वाद आना बंद हो गया और ना सुगंध आ रहा था। 4 नवंबर को रात में मुझे वापस बुखार आया और बहुत ठंड लग रहा था और बहुत खराब अनुभव रहा। 5 नवंबर को डॉक्टर को जाके दिखाया और टायफायड व मलेरिया का टेस्ट कराया जो नेगेटिव था। डॉक्टर ने वायरल फीवर है कह के मेडिसिन दिया परंतु उसको खाने के बावजूद मुझे बुखार वापस आया।
6 नवंबर को मैंने अपना कोरोना एंटीजन टेस्ट कराया जिसमें रिपोर्ट नेगेटिव था, पर कोरोना लक्षण होने के कारण मेरा RT PCR टेस्ट सैंपल भी लिया गया और मुझे होम आइसोलेशन में रहने को कहा गया।इस समय में मुझे बुखार आते रहे और कमजोरी बहुत थी और कोई मेडिसिन से बुखार नी जा रहा था।
7 नवंबर को मेरा RT PCR रिपोर्ट आया जिसमें मेरा कोरोना पॉजिटिव आया था और मुझे मेडिसिन देके 17 दिन होम आइसोलेशन में रहने को कहा गया।मेडिसिन खाने के बाद मुझे बुखार आना बंद हो गया और चौथे दिन से मुझे स्वाद आना चालू हो गया परंतु इन मेडिसिन का डोज इत्ता ज्यादा था कि जो मैं सामान्य दिनों में 7 8 घंटा सोता हूं, वो इस मेडिसिन लेने के कारण 10 11 घंटा नींद आ रहा था और शरीर सुस्त हो गया था और कमजोरी बहुत थी।मेरे कोरोना पॉजिटिव आने के बाद मेरे परिवार वालों का भी कोरोना टेस्ट किया गया, जिसमें मेरे भाई का भी रिपोर्ट पॉजिटिव आया। वो भी अभी अच्छा स्वस्थ महसूस कर रहा।
भाग 2- होम आइसोलेशन
1 कमरे में 17 दिन बिताना बहुत कठिन काम है। मुझे घर में रहने का बचपन से ज्यादा आदत रहा है इसलिए मुझे ज्यादा परेशानी नहीं हुई, परंतु कोरोना के कारण जैसे महसूस हो रहा था तो उसके कारण छोटे छोटे चीजों से भी ज्यादा सोचना हो जाता है।
समाचार में जो बताया जाता है कि कोरोना संक्रमित मरीज ने तनाव के कारण ये कर लिया या वो कर लिया, ये चीजें किसी के भी साथ हो सकती है क्योंकि कोरोना का डर मानसिक तनाव लाता है और एक कमरा में अकेले इत्ते दिन बिताना है। इसलिए जरूरी है कि अगर किसी को कोरोना हुआ है तो अपना दिमाग संतुलित रखे।
मैंने भी इस समय में दिमाग संतुलित रहे उसके लिए खुद को व्यस्त रखा था। आपको जो चीज भी अच्छा लगता है या कोई चीज सीखने का मन हो, तो उसमे अपना समय दे सकते है। इससे आपको समय का पता नही चलेगा।
मैंने मूवी या कोई सीरीज देखना, ब्लॉग्स पढ़ना और लिखना, चेस खेलना, कुंडली बनाने सीखना, यूट्यूब चैनल मैनेज करना, इतिहास पढ़ाई करके अपने आप को व्यस्त रखा जिससे मुझे बहुत कुछ सीखने मिला और दिमाग भी संतुलित रहा।
इस होम आइसोलेशन में एक और चीज के कारण मेरा व्यस्त रहना हुआ। मेरे घर के पालतू कुत्ता (किलर) और कबुतर ( घर का दादा) के लड़ाई का एक वीडियो 3 साल पहले मैंने यूट्यूब में डाला था। उस वीडियो में दीवाली के बाद से अचानक से व्यु बड़कर 133K+ हो गया है और 41 देशों से वीडियो देखा जा रहा है। भले ही दोनों अब हमारे साथ नहीं है, फिर भी इस समय में उन्होंने साथ दिया और इस वीडियो के कारण यूट्यूब की बहुत सी चीजें सीखने को मिली। आप भी ये वीडियो देख सकते हैं- https://youtu.be/8LkwqI3cvDU
इस बार दीवाली भी नहीं मना पाया और अपने गांव भी नी जा सका जो पहली बार हुआ है।
भाग 3- लापरवाही ना करे
अंत में मैं ये कहना चाहूंगा कि अगर किसी को भी कोरोना के कोई भी लक्षण आए या बुखार आए तो टेस्ट जरूर करवाएं, मेरे जैसे स्वयं मेडिसिन लेके लापरवाही ना करे, वरना मेरे जैसे चीजें खराब हो सकती है और अगर कोई होम आइसोलेशन में है, तो वह मेरे जैसे नई नई चीजें करके खुद को व्यस्त रख सकता है, जिससे कोरोना का तनाव नी आएगा।
जहां भी जाए वहां मास्क जरूर पहनें और लक्षण दिखते ही जल्द टेस्ट कराएं।
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